छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन परिचय, निबंध, जयंती (Chhatrapati Shivaji Maharaj Biography in Hindi)

छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन परिचय, निबंध, जयंती, कौन थे, इतिहास, कथा, जन्म कब हुआ, राज्याभिषेक कब हुआ, बच्चे, परिवार, गोत्र, हिंदी कविता, जाति (Chhatrapati Shivaji Maharaj Biography in Hindi) (Height, Father Name, Birth Date, History, Caste)

जब कभी देश में मुगल आक्रमणकारियों को परास्त करने वाले शूरवीरों की बात होती है, तो इस दिशा में छत्रपति शिवाजी महाराज का भी नाम लिया जाता है। छत्रपति शिवाजी महाराज एक ऐसी शख्सियत थी जिन्होंने अपने जिंदा रहते हुए एक भी मुगल आक्रमणकारी को अपने स्वराज्य को छीनने का अधिकार नहीं दिया। शिवाजी महाराज समूल विध्वंस की नीति का पालन करते थे अर्थात अगर कोई उनकी मातृभूमि पर कब्जा करने का प्रयास करता था तो वह उसका पूर्ण रूप से विनाश करने की ताकत रखते थे। आइए शिवाजी महाराज जैसी महान शख्सियत की जीवनी के बारे में जानते हैं।

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छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन परिचय (Chhatrapati Shivaji Maharaj Biography in Hindi)

पूरा नामशिवाजी राजे भोंसले
उपनामछत्रपति शिवाजी, शिवाजी महाराज
शासकीय नामछत्रपति शिवाजी महाराज
व्यवसायशासक (राजा)
शासन काल1674 – 1680 ई.
शासन अवधि38 वर्ष
जन्मतिथि19 फ़रवरी, 1630 ई.
जन्मस्थानशिवनेरी दुर्ग, महाराष्ट्र, भारत
मृत्यु तिथि3 अप्रैल, 1680 ई.
मृत्यु स्थलरायगढ़, मराठा साम्राज्य (वर्तमान में महाराष्ट्र), भारत
समाधि स्थलरायगढ़ किला, रायगढ़, मराठा साम्राज्य (वर्तमान में महाराष्ट्र)
आयु (मृत्यु के समय)50 वर्ष
गुरुसमर्थ रामदास
वंशभोंसले
राजघरानामराठा
राज्याभिषेक6 जून, 1674 ई.
गृहनगर/राज्य    शिवनेरी दुर्ग, महाराष्ट्र, भारत
शैक्षिक योग्यता  ज्ञात नहीं
धर्महिन्दू
जातिक्षत्रीय
शौक/अभिरुचिघुड़सवारी, तलवारबाजी
वैवाहिक स्थितिविवाहित

छत्रपति शिवाजी महाराज कौन थे, वंश, गोत्र एवं जाति (Chhatrapati Shivaji Maharaj Gotra, Caste)

शिवाजी महाराज मराठा राजघराने के भोंसले वंश से संबंध रखते हैं जिसका कहीं ना कहीं संबंध राजपूतो से भी है। कुछ लोगों के अनुसार शिवाजी को मुस्लिम विरोधी कहा जाता है परंतु यह बात पूर्ण सत्य नहीं है, क्योंकि शिवाजी की सेना में कई मुस्लिम नायक और सेनानी थे, साथ ही इनकी सेना में मुस्लिम सरदार और सूबेदारो की संख्या भी काफी अच्छी थी। वास्तव में देखा जाए तो शिवाजी इस्लामिक आतंकवाद और कट्टरता के खिलाफ थे। इसलिए कहीं नहीं पर इतिहास में इतिहासकारों के द्वारा इन्हें मुस्लिम विरोधी जैसा चित्रित किया गया है।

छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म एवं उम्र (Chhatrapati Shivaji Maharaj Birth and Age)

मराठा गौरव और हिंदू सम्राट के तौर पर प्रसिद्ध छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म साल 1630 में 19 फरवरी के दिन भारत देश के महाराष्ट्र राज्य के शिवनेरी दुर्ग अर्थात शिवनेरी किले में हुआ था और इनकी मृत्यु साल 1680 में 3 अप्रैल के दिन हुई थी। शिवाजी महाराज की मृत्यु के समय इनकी उम्र लगभग 50 साल के आसपास में थी।

छत्रपति शिवाजी महाराज का परिवार (Chhatrapati Shivaji Maharaj Family)

पिताशाहजी भोंसले
माताजीजाबाई
भाईइकोजी 1 (सौतेला भाई)
पत्नीसइबाई निम्बालकर (1640-1659), सोयराबाई मोहिते (1680), पुतळाबाई पालकर (1653-1680), सकवरबाई गायकवाड़ (1656-1680)
बच्चेबेटा- संभाजी (सइबाई), राजाराम (सोयराबाई), बेटी- सखुबाई (सइबाई), रूनुबाई (सइबाई), अंबिकाबाई (सइबाई), दीपाबाई (सोयराबाई), कमलाबाई (सकवरबाई)

छत्रपति शिवाजी महाराज की शिक्षा (Chhatrapati Shivaji Maharaj Education)

छत्रपति शिवाजी महाराज राजनीति करने में और युद्ध की कला में निपुण थे। उनका अधिकतर बचपन का समय अपनी माता जिजाऊ मां साहेब के मार्गदर्शन में ही व्यतीत हुआ। शिवाजी को हालांकि बचपन में कुछ खास शिक्षा प्राप्त नहीं हुई थी, परंतु इन्हें भारतीय इतिहास और राजनीति की अच्छी जानकारी थी। शिवाजी जी महाराज शुक्राचार्य और कौटिल्य को आदर्श मानते थे और उन्हीं की कूटनीति का सहारा लेना उचित समझते थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक (Chhatrapati Shivaji Maharaj Coronation)

हमेशा हिंदवी स्वराज की कामना करने वाले और मुगलों के सबसे बड़े विरोधी छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक साल 1674 में हुआ था। शिवाजी महाराज के द्वारा अपने आपको मराठा साम्राज्य का स्वतंत्र शासक घोषित किया गया था और इन्हें महाराष्ट्र में ही मौजूद रायगढ़ नाम के किले में राजा का ताज पहनाया गया था। शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक होते ही मुगल सल्तनत में खलबली सी मच गई थी, क्योंकि शिवाजी के पराक्रम और शिवाजी की युद्ध नीति से मुगल अच्छी तरह से वाकिफ थे। राज्याभिषेक होते ही शिवाजी महाराज को हिंदू धर्म के रक्षक का खिताब प्राप्त हुआ था। ताजपोशी के पश्चात शिवाजी महाराज को अपने राज्य के अंतर्गत भू राजस्व इकट्ठा करने और टैक्स लगाने का अधिकार प्राप्त हो गया था।

छत्रपति शिवाजी महाराज का प्रशासन (Chhatrapati Shivaji Maharaj Administration)

शिवाजी महाराज के द्वारा जो प्रशासन बनाया गया था वह काफी हद तक डेक्कन प्रशासनिक प्रथा से मिलता-जुलता था। शिवाजी महाराज के द्वारा तकरीबन आठ मंत्रियों की नियुक्ति की गई थी जिन्हें अष्टप्रधान कहा जाता था। इन 8 मंत्रियों के द्वारा अलग-अलग मामले में शिवाजी महाराज को राय सलाह दी जाती थी। इसके अलावा अन्य कई पदों का निर्माण भी शिवाजी ने किया हुआ था, जिसके अंतर्गत पेशवा का पद वित्त और सामान्य प्रशासन की देखभाल के लिए बनाया गया था, सेनापति का पद एक सम्मानीय पद था। मजूमदार का पद और काम ठीक वहीं था, जो आज के समय में अकाउंटेंट करते हैं। इसके अलावा न्यायाधीश और पंडितराव इत्यादि धार्मिक कामों की देखभाल करते थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु (Chhatrapati Shivaji Maharaj Death)

औरंगजेब और अन्य मुगल राजाओं की नाक में दम करने वाले भारत के वीर सपूत स्वाभिमानी राजा छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु वर्तमान के महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ नाम के इलाके में साल 1680 में 3 अप्रैल के दिन हुई थी और इनकी समाधि का स्थल वर्तमान के महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ किले में ही मौजूद है। शिवाजी महाराज आज भले ही हमारे बीच नहीं है और आज उनको इस धरती को छोड़े हुए कई साल व्यतीत हो गए हैं परंतु आज भी जब कभी हम शिवाजी महाराज की जीवनी पढ़ते हैं, तब हमें उनकी जीवनी से स्वावलंबी और स्वाभिमानी बनने की प्रेरणा मिलती है। हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपनी मातृभूमि पर कब्जा करने की सोच रखने वाले हर दुष्ट व्यक्ति का पुरजोर प्रतिकार करना चाहिए और उनका समूल नाश करना चाहिए।

छत्रपति शिवाजी और अफजल खान का युद्ध (Chhatrapati Shivaji and Afzal Khan War)

प्रतापगढ़ के एक किले में एक झोपड़ी में साल 1959 में 10 नवंबर के दिन अफजल खान और शिवाजी महाराज जी की मुलाकात हुई, जिनके बीच यह शर्त रखी गई थी कि दोनों अपने साथ सिर्फ एक ही तलवार ले करके आएंगे। हालांकि शिवाजी महाराज यह अच्छी तरह से जानते थे कि अफजल खान भरोसेमंद नहीं है। इसलिए शिवाजी महाराज ने अपने कपड़ों के नीचे कवच डाला और अपनी दाई भुजा पर बाघ नख भी रखा और अफजल खान से मिलने चले गए। जैसा कि शिवाजी महाराज को लगता था अफजल खान ने धोखे से शिवाजी महाराज पर हमला करने का प्रयास किया परंतु शिवाजी महाराज ने अपने बाघ नख से अफजल खान के पेट में हमला कर दिया जिससे अफजलखान बुरी तरह से घायल हो गया और तत्काल उसकी मृत्यु हो गई।

छत्रपति शिवाजी के द्वारा जारी मुद्रा (Chhatrapati Shivaji Maharaj Currency)

शिवाजी के द्वारा जो राजमुद्रा जारी की गई थी, वह अष्टकोण वाली मुहर थी, जिस पर संस्कृत भाषा में शिवरायांचे आठवावे स्वरुप। शिवरायांचा आठवावा साक्षेप। शिवरायांचा आठवावा प्रताप। भूमंड लिखा हुआ था। इस मुद्रा का इस्तेमाल शिवाजी के द्वारा अपने पत्र और सैनिक सामग्री पर किया जाता था। आज भी भारत के विभिन्न म्यूजियम में शिवाजी के हजारों पत्र रखे हुए हैं जिस पर राजमुद्रा लगी हुई है। कहा जाता है कि शिवाजी के पिता जी के द्वारा इस राज्य मुद्रा को उन्हें तब दिया गया था, जब शाह जी ने जीजाबाई और तरुण शिवाजी को पुणे की जागीर संभालने के लिए भेजा था।

छत्रपति शिवाजी की धार्मिक नीति (Chhatrapati Shivaji Maharaj Religious Policy)

शिवाजी हिंदुत्व धर्म के प्रबल समर्थक थे। हालांकि इसका मतलब यह नहीं था कि यह धार्मिक असहिष्णुता की भावना रखते थे। इनके साम्राज्य मे मुसलमानों को भी धार्मिक स्वतंत्रता पूर्ण रूप से प्रदान की गई थी। शिवाजी के द्वारा खुद भी कई मुसलमानों की मस्जिद के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई गई थी। जिस प्रकार से शिवाजी के द्वारा हिंदू पंडितों को सम्मान प्रदान किया जाता था, उसी प्रकार से शिवाजी के द्वारा मुसलमान फकीर और संतों को भी सम्मान दिया जाता था। शिवाजी की सेना में बड़ी संख्या में मुसलमान सैनिक भी थे। हालांकि शिवाजी के द्वारा पारंपरिक शिक्षा पर ज्यादा जोर दिया जाता था। शिवाजी के द्वारा अपने अभियानों का आरंभ दशहरा के मौके पर किया जाता था। शिवाजी का मानना था कि अगर उनके हिंदू धर्म का विरोध या फिर हिंदू धर्म की बुराई या फिर उनकी मिट्टी पर कब्जा करने का प्रयास कोई भी दुष्ट व्यक्ति करेगा, तो वह उसका समूल नाश कर देंगे।

छत्रपति शिवाजी महाराज संबंधित प्रमुख तिथि (Shivaji Maharaj Important Dates)

19 फरवरी 1630शिवाजी महाराज पैदा हुए
14 मई 1640शिवाजी और साईं बाई की शादी हुई
1642शिवाजी और सोयाराबाई की शादी हुई
1646  छत्रपति ने तोरण किले पर अधिकार किया
1656  चंद्र राव मोरे से शिवाजी महाराज ने जावली जीती।  
10 नवंबर, 1659  शिवाजी ने अफजल खान का वध किया।
5 सितंबर, 1659  शिवाजी के पुत्र संभाजी का जन्म हुआ।
1659  बीजापुर किले पर शिवाजी ने अधिकार किया।
6 से 10 जनवरी, 1664  शिवाजी महाराज ने सूरत पर आक्रमण किया और काफी संपत्ति प्राप्त की।
1665शिवाजी ने पुरंदर संधि पर हस्ताक्षर किया।
1666  आगरा की कैद से शिवाजी महाराज भाग निकले।
1668  औरंगजेब और शिवाजी ने शांति संधि की।
1670  दूसरी बार शिवाजी ने सूरत पर आक्रमण किया।
1670राजाराम पैदा हुए।
1674  शिवाजी को रायगढ़ में छत्रपति की पदवी मिली और राज्य अभिषेक हुआ।
1680  शिवाजी महाराज ने दुनिया को अलविदा कहा।

शिवाजी महाराज के जीवन की प्रमुख घटनाएं (Shivaji Maharaj Wars)

शिवाजी के जीवन की प्रमुख घटनाएं निम्नानुसार है।

तोरण की विजय

शिवाजी ने मराठा सरदार के तौर पर अपना पराक्रम दिखाकर जो पहला किला कब्जा किया था वही तोरण का किला था। इस किले को जीतने में इन्होंने सिर्फ 16 साल की उम्र में ही कामयाबी हासिल की और इसी किले को जीतने के पश्चात शिवाजी के मन में रायगढ़ और प्रतापगढ़ पर अधिकार करने का ख्याल आया। तोरण का किला जीतने के पश्चात बीजापुर के सुल्तान को भी चिंता होने लगी कि कहीं शिवाजी उनके साम्राज्य पर भी आक्रमण ना कर दे और इसीलिए शिवाजी के पिता को बीजापुर के सुल्तान ने जेल में डाल दिया। इस प्रकार शिवाजी ने साल 1659 में बीजापुर पर आक्रमण करने का प्रयास किया। उसके बाद बीजापुर के सुल्तान के द्वारा अपने सेनापति अफजल खान को तकरीबन 20000 मुगल सैनिकों के साथ शिवाजी को पकड़ने के लिए भेजा गया, परंतु शिवाजी के द्वारा अफजल खान को बाघ के पंजे से खत्म कर दिया गया और उसके काफी सैनिकों की भी हत्या कर दी गई। इस प्रकार साल 1662 में शिवाजी और बीजापुर के सुल्तान के बीच शांति समझौता हुआ और शिवाजी ने बीजापुर के सुल्तान को अपने द्वारा जीते गए प्रदेश का स्वतंत्र शासक बनाया।

कोंडाना किले की विजय

कोंडाना किले पर नीलकंठ राव नाम का व्यक्ति राज करता था। कोंडाना किले को पाने के लिए शिवाजी के कमांडर तानाजी मलूसरे और जय सिंह प्रथम के किला रक्षक उदयभान राठौड़ के बीच तगड़ा युद्ध हुआ था, जिसमें तानाजी मालुसरे की मृत्यु हो गई, परंतु इसके बावजूद मराठों का कोंडाना किले पर अधिकार हो गया। बता दें कि तानाजी मालुसरे के ऊपर एक बॉलीवुड फिल्म भी बन चुकी है, जो काफी सुपरहिट साबित हुई।

शिवाजी के राज्य की सीमा (Shivaji Maharaj State Border)

शिवाजी के द्वारा काफी बड़े पैमाने पर अपने राज्य का विस्तार किया गया था‌। शिवाजी की पूर्वी सीमा उत्तर में बागलना को और दक्षिण की तरफ नासिक तथा पुणे जिले के बीच से होती हुई सतारा और कोल्हापुर के जिले के अधिकतर भाग को अपने में समेट लेती थी। शिवाजी ने पश्चिमी कर्नाटक के भी कई इलाकों को अपनी राज्य सीमा में शामिल किया हुआ था।

शिवाजी महाराज की सेना (Shivaji Maharaj Army)

शिवाजी महाराज के द्वारा अपनी एक परमानेंट सेना का निर्माण किया गया था। जब शिवाजी की मृत्यु हुई थी तब उस समय उनकी सेना में तकरीबन 40000 नियमित और परमानेंट काम करने वाले घुड़सवार, 100000 से भी अधिक पैदल चलने वाले सैनिक और 1260 हाथी मौजूद थे। शिवाजी के तोपखाने के बारे में हमें सही प्रकार की जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।

शिवाजी महाराज के किले (Shivaji Maharaj Fort)

प्राप्त जानकारियों के अनुसार शिवाजी के पास तकरीबन 250 किले मौजूद थे, जिनकी मरम्मत करवाने के लिए शिवाजी के द्वारा काफी बड़े पैमाने पर पैसे खर्च किए जाते थे। शिवाजी के द्वारा कई दुर्ग पर अधिकार किया गया था, जिसमें से सबसे प्रसिद्ध दुर्ग सिंहगढ़ दुर्ग था। इस पर अधिकार करने के लिए शिवाजी के द्वारा तानाजी को भेजा गया था, परंतु तानाजी वापस कभी लौट ना सके, क्योंकि युद्ध में उनकी मौत हो गई।

शिवाजी महाराज की आगरा यात्रा (Shivaji Maharaj Aagra Tour)

औरंगजेब के द्वारा शिवाजी से कहा गया था कि वह उनसे मिलना चाहते हैं, साथ ही औरंगजेब ने यह भी कहा था कि वह उन पर कोई भी आक्रमण नहीं करेंगे। इस प्रकार शिवाजी औरंगजेब की बात पर भरोसा करके आगरा में मौजूद उनके दरबार में मिलने चले गए। हालांकि शिवाजी अकेले नहीं गए थे परंतु उन्होंने अपने पुत्र संभाजी और तकरीबन 4000 मराठा सैनिकों के साथ आगरा प्रस्थान किया था। यह घटना साल 1666 में 9 मई की है। औरंगजेब के दरबार में जाने के बाद शिवाजी को उचित आदर्श सम्मान प्राप्त नहीं हुआ। इस पर शिवाजी ने सभी दरबारियों के सामने ही औरंगजेब को विश्वासघाती कह दिया जिसकी वजह से औरंगजेब अत्यधिक क्रोधित हुआ और उसने शिवाजी और उनके बेटे को जयपुर भवन में मुगल सैनिकों के द्वारा कैद करवा लिया। हालांकि साल 1666 में 13 अगस्त के दिन फल की टोकरी में छिपकर शिवाजी वहां से भागने में सफल हुए और 22 सितंबर साल 1666 में रायगढ़ पहुंचने में सफल हुए।

शिवाजी महाराज के गुरिल्ला युद्ध के अविष्कारक (Shivaji Maharaj Guerilla War)

इतिहासकारों के अनुसार भारत देश में गोरिल्ला युद्ध का आरंभ करने वाले व्यक्ति का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज ही था। यह एक बहुत ही शानदार युद्ध नीति थी। कई जगह पर इस बात की भी जानकारी प्राप्त होती है कि जब अमेरिका और वियतनाम का युद्ध चल रहा था तो इसी नीति पर अमल करते हुए वियतनाम की सेना ने अमेरिका से जंगलों को जीतने में कामयाबी हासिल करी थी। शिवाजी के शासन के दरमियान हीं शिव सूत्र नाम का एक ग्रंथ लिखा गया था, जिसमें भी इस युद्ध नीति का वर्णन विस्तार से किया गया है। बता दें कि गोरिल्ला युद्ध को छापामार युद्ध भी कहा जाता है। इस युद्ध में दुश्मन की सेना के पीछे या फिर पहाड़ों में छुप करके आक्रमण किया जाता है और तेज गति से दुश्मनों का खात्मा किया जाता है।

शिवाजी महाराज के गुरु (Shivaji Maharaj Guru)

शिवाजी के गुरु का नाम समर्थ रामदास जी था, जो कि उस समय भारत के प्रसिद्ध साधु थे। समर्थ रामदास गुरु जी के द्वारा मराठी भाषा में एक ग्रंथ लिखा गया था, जिसका नाम दासबोध रखा गया था। समर्थ रामदास जी के बारे में भारतीय लोगों को काफी कम ही पता है, परंतु बता दें कि इनके द्वारा देश में कश्मीर से कन्याकुमारी तक तकरीबन 1100 से भी ज्यादा मठ और अखाड़े स्थापित करने का काम किया गया था। समर्थ रामदास जी भगवान महावीर अर्थात बजरंगबली के परम भक्त थे। शिवाजी महाराज को जब भी कोई काम करना होता था तब वह अपने गुरु से आज्ञा अवश्य लेते थे और उस काम के बारे में विचार विमर्श करते थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज कुलदेवी तुलजा भवानी के उपासक (Shivaji Maharaj Tulja Bhavani Worshipers)

वर्तमान के समय में महाराष्ट्र राज्य के उस्मानाबाद में तुलजापुर नाम का एक स्थान मौजूद है। यहां पर तुलजा भवानी का बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है। बता दें कि शिवाजी महाराज की कुलदेवी का नाम तुलजा भवानी ही है। शिवाजी महाराज के अलावा भी महाराष्ट्र में अन्य कई समुदायों की कुलदेवी तुलजा भवानी है जो कि माता विंध्यवासिनी और माता दुर्गा का ही एक रूप है। शिवाजी महाराज कुलदेवी मां तुलजा भवानी के परम भक्त थे और समय-समय पर उनकी पूजा प्रार्थना और उन्हें बलि देने का काम करते थे। ऐसी भी मान्यता है कि एक बार खुद माता तुलजा भवानी ने प्रकट होकर के शिवाजी महाराज को तलवार प्रदान की थी, ताकि वह हिंदू धर्म की रक्षा मुगल आक्रमणकारियों से कर सके। वर्तमान के समय में यह तलवार इंग्लैंड देश के लंदन शहर के म्यूजियम में रखी हुई है।

शाहिस्ता खान और 40 सैनिकों का वध

मुगल शासक औरंगजेब का आदेश पाने के पश्चात शाइस्ता खान अपने साथ तकरीबन डेढ़ लाख से भी अधिक मुगल सैनिकों की फौज लेकर के पूने पहुंचा और वहां पर उसने भयंकर लूटपाट करना शुरू कर दिया। इस पर शिवाजी महाराज ने तकरीबन 350 सैनिकों के साथ शाइस्ता खान पर तगड़ा आक्रमण किया और उसके हाथों की तीन उंगलियां भी काट दी। हालांकि इस हमले में शाइस्ता खान बचने में कामयाब हुआ परंतु शिवाजी महाराज ने शाइस्ता खान के बेटे और तकरीबन 40 मुगल सैनिकों की हत्या कर दी। इस हार से औरंगजेब काफी शर्मिंदा हुआ और उसने शाहिस्ता खान को दक्षिण भारत से हटाकर बंगाल का सूबेदार नियुक्त कर दिया। अपनी हार का बदला लेने के लिए एक बार शाइस्ता खान के द्वारा तकरीबन 15000 मुगल सैनिकों की व्यवस्था की गई और शाइस्ता खान के द्वारा उसके बाद शिवाजी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले कई इलाकों पर आक्रमण किया और उन्हें जलाकर तबाह कर दिया गया। इस पर शिवाजी ने भी मुगलों के इलाके में जाकर के जमकर लूटपाट की। हालांकि उन्होंने किसी भी आम नागरिक को अपनी लूटपाट का शिकार नहीं बनाया।

छत्रपति शिवाजी महाराज का सिसोदिया राजपूतों से संबंध (Shivaji Maharaj Sisodia Rajput Relation)

शिवाजी महाराज के द्वारा साल 1674 तक काफी बड़े पैमाने पर अपने राज्य को विस्तारित कर लिया गया था और इसके पश्चात शिवाजी ने अपना राज्य अभिषेक करने के बारे में सोचा परंतु ब्राह्मणों के द्वारा उनका विरोध किया गया। ब्राह्मणों के द्वारा कहा गया कि शिवाजी क्षत्रिय नहीं है, इसीलिए उन्हें सबसे पहले क्षत्रियता का प्रमाण लाना होगा, तभी उनका राज्य अभिषेक हो सकेगा। इस पर बालाजी राव के द्वारा शिवाजी महाराज का संबंध मेवाड़ के सिसोदिया वंश से होना कहा गया और इसके उचित प्रमाण भी दिए गए। इसके पश्चात शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ। हालांकि इसके बावजूद भी पुणे के ब्राह्मणों ने शिवाजी को अपना महाराजा मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद शिवाजी के द्वारा अष्टप्रधान मंडल को स्थापित किया गया।

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FAQ

Q : छत्रपति शिवाजी महाराज कौन थे?

Ans : भारत के महातम राजाओं में से एक

Q : छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती कब है?

Ans : 19 फरवरी

Q : छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म कब हुआ?

Ans : 19 फरवरी, 1630 ई.

Q : छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु कब हुई?

Ans : 3 अप्रैल, 1680 ई.

Q : छत्रपति शिवाजी महाराज गोत्र क्या था?

Ans : भोंसले

Q : छत्रपति शिवाजी क्यों प्रसिद्ध है?

Ans : बहादुरी, रणनीति और प्रशासनिक कौशल की वजह से

Q : भारतीय इतिहास में शिवाजी का क्या योगदान था?

Ans : मुगलों का डटकर प्रतिकार किया, मराठा साम्राज्य का विस्तार किया, हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की।

Q : शिवाजी के पुत्र का नाम क्या था?

Ans : संभाजी

Q : शिवाजी महाराज के कुत्ते का नाम क्या था?

Ans : वाघ्या

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