कृष्ण ने इस भक्त की जान बचाकर प्रदान कि आखों की रोशनी

सूरदास जी की कृष्ण भक्ति के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। एक बार सूरदास कृष्ण की भक्ति में इतने डूब गए थे कि वे एक कुंए जा गिरे, जिसके बाद भगवान कृष्ण ने खुद उनकी जान बचाई और आंखों की रोशनी वापस कर दी थी।

सूरदास जी का जन्म सन्‌ 1478 ई. में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता रामदास थे। सुदास जी जन्म से ही अंधे थे।

सूरदास जी कृष्ण भगवान के भक्त थे, साथ ही उनके सबसे प्रिय मित्र थे।।

सूरदास जी ने प्रभु श्रीकृष्ण का गुणगान करते हुए उन्होंने सूर सागर, सूर सारावली, साहित्य लहरी जैसी महत्वपूर्ण रचनाएं कीं। 

श्री वल्लभाचार्य जी सूरदास जी के गुरु थे। उन्होंने ही सूरदास जी को श्रीकृष्ण भक्ति की प्रेरणा दी थी। उन्होंने ही उनका मार्गदर्शन किया था।

श्री वल्लभाचार्य जी ने श्री नाथ जी के मंदिर में श्रीकृष्ण जी के लीलाओं के गान का भार सूरदास जी को दिया था। उसके बाद से वे हमेशा कृष्ण लीलाओं का गान करते रहे।

भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उनको दृष्टि प्रदान की थी। यह घटना उस समय हुई जब एक दिन सूरदास जी श्रीकृष्ण भक्ति में डूबे कहीं जा रहे थे, तभी रास्ते में वे एक कुंआ में गिर पड़े, उनकी इच्छा कृष्ण के दर्शन पाना था 'तभी उन्हें भगवान ने दर्शन दिए।।

कृष्ण भगवान ने सूरदास जी को वरदान मांगने को कहा तो उन्होंने फिर से उनको दृष्टिहीन कर देने को कहा। सूरदास जी ने कहा कि वे अपने प्रभु के अतिरिक्त किसी और को नहीं देखना चाहते।

2022 में सूरदास जयंती 6 मई को मनाई जाएगी।।

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