डीजीपी कांफ्रेंस लखनऊ (DGP Conference Lucknow News in Hindi)

डीजीपी कांफ्रेंस लखनऊ (DGP Conference Lucknow News in Hindi)

56वी डीजीपी कांफ्रेंस यानि कांफ्रेंस ऑफ़ डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, का आयोजन आज उत्तरप्रदेश के लखनऊ में किया गया है। डीजीपी कांफ्रेंस दो दिवसीय कांफ्रेंस है जो 20-21 नवंबर, 2021 तक चलेगी।इस कांफ्रेंस में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डीजीपी और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज और सेंट्रल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन के हेड अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएंगे। तो आइए इस आर्टिकल के माध्यम से चल रही 56वी डीजीपी कांफ्रेंस पर एक नजर डालते हैं और इससे जुड़े पहलुओं पर चर्चा करते हैं।

DGP conference lucknow in hindi

क्या है 56वी डीजीपी कांफ्रेंस

सन 2014 से तत्कालीन सर्जरी की रुचि डीजीपी कांफ्रेंस में देखी गई है। प्रधानमंत्री की कोशिश रहती है कि इस कांफ्रेंस पर ध्यान दिया जाए। इस कांफ्रेंस के तहत प्रधानमंत्री तक बड़े अफसरों को अपनी बात पहुंचाने का मौका मिलता है। इस कॉन्फ्रेंस के तहत देश के प्रधानमंत्री इंटरनल सिक्योरिटी और पुलिसिंग से जुड़े जमीनी मुद्दों को अफसर से सुनते हैं। इस बार 56वी डीजीपी कांफ्रेंस का आयोजन लखनऊ में स्थित पुलिस हेडक्वार्टर में किया जा रहा है।इस कांफ्रेंस में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डीजीपी और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज और सेंट्रल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन के हेड अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएंगे। इनके अलावा अन्य अतिथि वर्चुअल मध्यम से इस कांफ्रेंस का हिस्सा बनेंगे।

मुख्य विषय जिनपर पर होगी चर्चा

  • साइबर क्राइम
  • काउंटर टेररिज्म
  • डेटा गवर्नेंस
  • नारकोटिक्स ट्रैफिकिंग
  • कारागार के सुधार संबंधी विषय

अब तक क्या कहा गया कांफ्रेंस में

देश के गृहमंत्री ने संबोधन में कहा है कि पुलिसिंग को राजनीति से अलग रखना चाहिए। साथ ही जेलों की स्थिति को बेहतर बनाने पर भी जोड़ दिया गया है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर गुमराह करनेवाले पोस्ट या कानून व्यवस्था में रुकावट डालनेवाले पोस्ट को सख्ती से डील करने पर भी चर्चा हुई है। गृहमंत्री ने बताया कि इस कार्य में सहयोग देने के लिए नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड को बनाया गया है।  इस कांफ्रेंस में राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियों के साथ मिल कर काम करने और तालमेल बनाए रखने की भी बात की गई है।

डीजीपी कांफ्रेंस का महत्व

  • डीजीपी कांफ्रेंस बड़े अधिकारियों को प्रधानमंत्री से अपना पक्ष साझा करने में मदद करता है।
  • साइबर क्राइम, कारागार संबंधी विषयों पर चर्चा, डेटा गवर्नेंस, काउंटर टेररिज्म पर जरूरी चर्चा की जाती है।
  • पुलिस के महत्व पर बल दिया जाता है।
  • कानून के लिए समस्या उत्पन्न  करने वालो से कैसे निपटा जाए इस बात पर चर्चा होती है।
  • केंद्र और राज्य से संबंधित एजेंसीयो का तालमेल देखा जाता है।
  • प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की उपस्थिति और इंटरनल सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दों को प्रकाश में लाने से जरूरी सुधारो की संभावना प्रबल हो जाती है।

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